Trikatu Churna






ऊँ

करोना -19 से बचाव के लिए अणु तेलमं  और त्रिकुटा चूर्ण, बढ़ेगी इम्यूनिटी और अनेक फायदे.

अणु तेल

इस तेल का नस्य का  लेने से आंख नाक कान आदि इंद्रियां  मजबूत होती है नाक में जमा कफ बाहर निकल जाता है शरीर  शुद्ध हो जाता है बालों का असमय सफेद   होना , गिरना भी  दूर हो जाता है यह तेल शरीर के सूक्ष्म आणु तक पहुंच जाता है इसीलिए आयुर्वेद में से अणु तेल कहा गया है

अणु तेल के अद्भुत फायदे


आवाज को साफ करता है इसका विधि पूर्वक नसय में लेने से सिर में दर्द हनु स्तंभ lock jaw ,  पीनस chronic coryza , facial paralysis , आदि दूर होते हैं

यह चेहरे की असमय में होने वाली झुर्रियों को रोकता है नसों को ताकत देता है

यह माइग्रेन, सिर का दर्द, मुंह का लकवा, नाक में सूजन, गले में जकड़न आदि में लाभकारी है

यह आंख नाक कान इंद्रियों की शक्ति में वृद्धि करता है इससे सिर के बाल ,मूंछ, दाढ़ी के बाल सफेद नहीं होते

यह त्वचा को अच्छा चमक देता है

यह नसों, शिराओं को बलवान करता है

नाक की सूजन को दूर करता है

यह शरीर के सभी स्रोतों में रुकावट को दूर करता है

यह गर्दन और गले क्षेत्र से अतिरिक्त कफ को निकालता है

यह गर्दन कंधे और छाती की मांसपेशियों को मजबूत करता है

यह मुख्य रूप से

सिर और गर्दन के रोगों में क्रॉनिक साइनसाइटिस, सर्दी खांसी नाक में सूजन गले में जलन या खुजली नाक में रुकावट गंध ना आना, नाक से पानी निकलना मैं लाभ देगा

अणु तेलमं का नस्य कैसे व कब लेना चाहिए ?

आयुर्वेद के अनुसार अणु तेल को सर्दियों के मौसम में, गर्मियों में प्रयोग किया जाना चाहिए | बरसात के मौसम में इसका नस्य नही लेना चाहिए | सुबह उठने के बाद अपने नित्यकर्मो से निपटने के बाद ही इसका नस्य लेना चाहिए | सीधी अवस्था में लेट कर 2 से 3 बूंद नाक में डालकर कुछ समय के लिए लेटे रहना चाहिए | कफ आदि निकले तो उसे थूक दें |

भूखे पेट, शौच से पहले, गिले सिर में एवं गर्भवती महिलाओं को इसका नस्य नही लेना चाहिए |
तेल डालने के बाद किसी से अपने हाथ तलवे  की मालिश भी करवाएं तो अच्छा लाभ होगा

त्रिकूट चूर्ण


आजकल अक्सर शरीर अनेक रोगों से घिरा रहता है. ऐसे में अगर आप हर रोज़ त्रिकटु  का  1/4 चम्मच शहद के साथ सेवन करेंगे तो आप अनेक रोगों से सहज ही छूट सकते हैं. ये आयुर्वेद में मल्टीविटामिन का विकल्प है इसको आयुर्वेद का सप्लीमेंट भी कहते हैं
करोना 19 की बीमारी में भी यह उच्च स्तरीय बचाव करता है

त्रिकटु के औषधीय गुण
1. एंटी-वायरल Anti-viral: वायरस के खिलाफ प्रभावी
2. एंटी-इन्फ्लेमेटोरी Anti-inflammatory: सूजन को कम करने वाला
3. कफ निकालने वाला expectorant
4. वातहर Carminative
5. कफहर Phlegm reducing
6. एंटीहाइपरग्लैसिमिक Anti-hyperglycemic: रक्त में ग्लूकोज को कम करता है
7. वमनरोधी Anti-emetic: उलटी रोकने वाला
8. एंटीहिस्टामिन Anti-histamine
त्रिकटु के सेवन के लाभ
1. त्रिकटु लीवर / यकृत liver को उत्तेजित stimulates कर बाइल bile का स्राव recreation कराता है जो की पाचन के लिए आवश्यक है।
2. त्रिकटु का सेवन पाचक अग्नि को बढ़ाता है जिससे पाचन बेहतर होता है।
3. यह वातहर है।
4. यह फेट फूलना, डकार आना आदि परेशानियों को दूर करता है।
5. यह शरीर से विषाक्त पदार्थों को भी दूर करने में सहयोगी है।
6. यह मेटाबोलिज्म metabolism को बढ़ाता है जिससे वज़न कम करने में सहयोग होता है।
7. यह पोषक तत्वों की शरीर में अवशोषण के लिए उपलब्धता को बढ़ा शरीर को बल देने में मदद करता है।
8. यह कफहर है।
9. यह कफ दोष के कारण बढे उच्च रक्तचाप Kapha based hypertension में लाभ करता है।
10. यह उष्ण प्रकृति hot potency के कारण कफ का नाश करता है और फेफड़ों को स्वस्थ्य करता है।
11. यह शरीर से आम दोष Ama Dosha को नष्ट करता है।
12. यह लिपिड लेवल Lipid level को कम करता है।
13. यह शरीर से वसा fat को कम करता है।
14. यह बुरे कोलेस्ट्रोल LDLsऔर ट्राइग्लिसराइड triglyceridesलेवल को कम करता है।
15. यह हिस्टामिन का बनना रोकता है इसलिए एलर्जी में लाभप्रद है।
त्रिकटु चूर्ण के चिकित्सीय उपयोग
1. त्रिकुटा का सेवन मुख्य रूप से पाचन और श्वास अंगों के रोगों में किया जाता है। यह तासीर में गर्म है और पित्त को बढ़ाता है तथा कफ को साफ़ करता है।
2. त्रिकुटा का सेवन मेटाबोलिज्म तेज़ करता है, इसलिए इसे वज़न कम करने के लिए भी खाया जाता है। इसे अनेकों आयुर्वेदिक दवाओं में भी डाला जाता है क्योकि यह दवा के अच्छे अवशोषण में मदद करता है bioavailability of other drugs। इसके अतिरिक्त यह वात-कफ हर भी है।

सेवन विधि और मात्रा
1. त्रिकुटा को आधा ग्राम से तीन ग्राम की मात्रा में ले सकते हैं।
2. इसे पानी अथवा शहद अथवा खाने के साथ मिला कर, लिया जा सकता है।
3. सांस रोग में इसे शहद के साथ लेना चाहिए।
4. भोजन करने से पंद्रह मिनट पहले इसे खाने से पाचन सही से होता है।
5. भोजन को सुपाच्य बनाने के लिए आप त्रिकुटा को भोजन पर छिड़क कर भी खा सकते हैं ।

त्रिकटु चूर्ण के सेवन में सावधानियाँ, साइड-इफेक्ट्स
1. यह पित्त को बढ़ाता है। इसलिए पित्त प्रकृति के लोग इसका सेवन सावधानी से करें।
2. अधिक मात्रा में सेवन पेट में जलन, एसिडिटी, आदि समस्या कर सकता है।
3. जिन्हें पेट में सूजन हो gastritis, वे इसका सेवन न करें।
4. शरीर में यदि पहले से पित्त बढ़ा है, रक्त बहने का विकार है Bleeding disorder, हाथ-पैर में जलन है, अल्सर है, छाले हैं तो भी इसका सेवन न करें।
5. आयुर्वेद में उष्ण चीजों का सेवन गर्भावस्था में निषेध है। त्रिकटु का सेवन गर्भावस्था में न करें।

मैंने यह 100 ग्राम के पैकेट में तैयार किया है

10ml अणु तेल तथा 100 ग्राम त्रिकुटा चूर्ण के पैक की कीमत 500 RS है जिसमें पार्सल चार्ज शामिल है जिसे चाहिए मेरे व्हाट्सएप पर कांटेक्ट करें डायरेक्ट कॉल ना करें

राजेश तालान ब्रह्मचारी गुरु शिष्य परंपरा से बना प्रणाचार्य
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