Himalayan little myrolelons purified & cultured by cow urine
ऊँ
Himalayan little myrolelons purified & cultured by cow urine
Product Code : 1003
1 वर्ष का रखा हुआ पुराना गुड ,मधु , सौठ, पीपल तथा सेंधा नमक इनमें से किसी एक के साथ प्रतिदिन मेरी बनाई इस विशेष हरड के साथ खाने से मनुष्य 100 वर्ष तक सुख पूर्वक जी सकता है
हिमालय पर्वत पर अपने मौसम में पैदा हुई हरड़ जो नवीन ,ठोस वजनदार हो जल में डालने पर डूब जाए ऐसी गुणकारी हरड का चयन करके मैंने गोमूत्र के द्वारा विशेष विधि से 10 बार भिगोया और 10 बार धूप में सुखाया तथा हाथ की चक्की से इसे पीसकर पाउडर बनाया अब इसके गुण कहता हूं
इसमें नवरस को छोड़कर पांच मधुर रस हैं परंतु कषाय रस ही अधिक है यह रूखी अग्नि को बढ़ाने वाली नेत्रों के लिए हितकर भोजन जल्दी पचाने वाली, आयु को बढ़ाती है शरीर में आवश्यकता अनुसार मास घटाती है बढ़ाती है मल को नीचे की ओर प्रेरित करती है इसके सेवन से सांस रोग , पेट के कीड़े ,मूत्र में में धातु का आना ,पेट संबंधी रोग ,आवाज की खराबी , आंतों की खराबी बार बार दस्त लगना ,मल मूत्र का रुक जाना, विषम ज्वर ,उल्टी ,हिचकी ,खुजली ,हृदय रोग कैंसर रोग ,पेट दर्द , पेट का ट्यूमर ,लिवर पथरी, तिल्ली के रोग ,मूत्राघात यह सब रोग दूर होते हैं
दंत मंजन के लिए इसके बारीक पाउडर का उपयोग करें मुंह के घाव में , बवासीर में इसका लेप भी लाभप्रद है
यह शोधित हरड़ जो भी दोष दूर करती है वह अपने प्रभाव से ही करती है
जो लोग इससे शारीरिक ताकत प्राप्त करना चाहते हैं वह वर्षा ऋतु में सेंधा नमक के साथ शरद ऋतु तक शक्कर के साथ और हेमंत ऋतु में सोंठ के साथ शिशिर ऋतु में पीपल के साथ वसंत ऋतु में शहद के साथ और ग्रीष्म ऋतु में गुड़ के साथ सेवन करें शरीर में अत्यधिक ताकत की प्राप्ति होगी
इस शोधित हरित को यदि चबाकर खाया जाए तो अमाशय की जठराग्नि को वृद्धि करती है पत्थर पर पीस कर खाया जाए तो मल को साफ करती है उबालकर खाया जाए तो मल को रोकती है भूनकर खाया जाए तो त्रिदोष दूर करती है भोजन के साथ सेवन करें तो बुद्धि बल और इंद्रियों को विकसित करती है पित और वायु को नष्ट करती है भोजन के साथ मूत्र विष्ठा और मल पदार्थों को बाहर निकालती है और जब भोजन करने के बाद इसे ऊपर से खाया जाए तो अन और पान संबंधी दोष वात-पित्त-कफ से उत्पन्न होने वाले विकारों को शीघ्र हरने वाली होती है
सेंधा नमक के खाने के साथ कफ शक्कर के साथ खाने से पित और घी के साथ खाने से वात संबंधी रोग और गुड़ के साथ खाने से सारी बीमारियां दूर करती हैं
यह हल्के रूप से शरीर से मल को बाहर निकालता है वात पित्त कफ के दोषों को और बलगम को पखाने के द्वारा बाहर निकालता है यह न केवल दस्त द्वारा आंतों में जमा हुआ दूषित मल को बाहर निकालता है बल्कि रोग से मुकाबला करने की शक्ति भी बढ़ाता है जहां एक तरफ शरीर में दूषित पदार्थ को आतो में से खींचकर मल के द्वारा बाहर फेंकता है वही शरीर के विभिन्न मार्गो में दोषी दोष धातु और मल से जो मार्ग रुक जाता है जिसके कारण विभिन्न प्रकार के रोग होने की संभावना होती है यह शोधित हरड़ सभी मार्ग को उनके अवरोध को दूर कर के शरीर को शुद्ध करती है यह प्रत्येक अंग ,हरदिया, मस्तिष्क पेट, खून आदि को प्राकृतिक दशा में नियमित करती है इसी कारण इस शोधित हरड़ का सेवन करने वाला बीमारियों से बचा रहता है
यह शरीर को भरपूर ताकत देने का भी गुण रखता है शरीर की सातों धातुओं को शुद्ध और पुष्ट करता है और शरीर में शक्ति स्फूर्ति और ताजगी प्रदान करता है शरीर की समस्त क्रियाओं को सुधारता और स्वभाविक बनाता है शरीर के जो छोटे-छोटे सूक्ष्म कोष होते हैं उनको स्वस्थ दशा में बनाए रखता है और समय से पहले आने वाले वृद्धावस्था को दूर करता है
रोजाना रात को सेवन करने से फुंसियां दाने और मुंहासे आदि नहीं निकलते फुंसियों पर इस शोधित हरड़ को पीसकर लेप करने से वह ठीक हो जाती हैं
1-बल बुद्धि बढ़ाने के अथवा मल-मूत्र साफ लाने के लिए इसे भोजन के साथ खाएंगे
2- भोजन पचाने के लिए जुखाम या खांसी या फ्लू या नसों में दर्द के लिए भोजन के बाद खाएं
3- इस शोधित हरड़ को चबाकर खाने से भूख बढ़ती है पीसकर चूर्ण खाने से पेट साफ होता है भारत में उबालकर खाने से दस्त बंद हो जाते हैं और मल बंध जाता है
4- भूनकर खाने से वात पित्त और कफ तीनों दोषो को समाप्त करती है
यदि आप इस शोधित हरड़ से अपने शरीर का कायाकल्प करना चाहते हैं तो उसकी भी विधि कहता हूं
वर्षा ऋतु में सेंधा नमक के साथ शरद ऋतु में शर्करा के साथ हेमंत में सूट के साथ और शिशिर में पीपली के साथ वसंत में मधु के साथ और गर्मियों में गुड़ के साथ शोधित हरड़ का चूर्ण खाइए पुरे शरीर का कायाकल्प हो जाएगा बुढ़ापा चला जाएगा जवानी आ जाएगी
5- बवासीर ,पेट की अपच,पेट की गांठ रक्तपित्त जीवन में मुनक्का के साथ दाद खाज पीलिया रोग में गोमूत्र के साथ हर्निया हो जाने पर अरंडी के तेल के साथ लेना चाहिए
रास्ता चलकर थके हुए , दुबले -पतले व्रत रखने वाले अधिक गर्म प्रकृति वाले गर्भवती स्त्री को वैद्य जानकारी में उपयोग करना चाहिए
उपयोग- रात को सोते समय एक छोटी चम्मच मात्रा 1 से 3 ग्राम की फंकी गुनगुने पानी के साथ सोते समय ले सप्ताह में एक दिन छुट्टी भी रख ले
मैंने इस शोधित और संस्कारित हरड़ का सौ ग्राम का पैकेट बनाया है जिसकी कीमत है 500 R's जिसमें कुरियर खर्च भी शामिल है इच्छुक व्यक्ति मेरे WhatsApp 90129 50604 पर बता सकते हैं
राजेश तालान
ब्रह्मचारी गुरु शिष्य परंपरा से बना प्राणाचार्य
Himalayan little myrolelons purified & cultured by cow urine
Product Code : 1003
1 वर्ष का रखा हुआ पुराना गुड ,मधु , सौठ, पीपल तथा सेंधा नमक इनमें से किसी एक के साथ प्रतिदिन मेरी बनाई इस विशेष हरड के साथ खाने से मनुष्य 100 वर्ष तक सुख पूर्वक जी सकता है
हिमालय पर्वत पर अपने मौसम में पैदा हुई हरड़ जो नवीन ,ठोस वजनदार हो जल में डालने पर डूब जाए ऐसी गुणकारी हरड का चयन करके मैंने गोमूत्र के द्वारा विशेष विधि से 10 बार भिगोया और 10 बार धूप में सुखाया तथा हाथ की चक्की से इसे पीसकर पाउडर बनाया अब इसके गुण कहता हूं
इसमें नवरस को छोड़कर पांच मधुर रस हैं परंतु कषाय रस ही अधिक है यह रूखी अग्नि को बढ़ाने वाली नेत्रों के लिए हितकर भोजन जल्दी पचाने वाली, आयु को बढ़ाती है शरीर में आवश्यकता अनुसार मास घटाती है बढ़ाती है मल को नीचे की ओर प्रेरित करती है इसके सेवन से सांस रोग , पेट के कीड़े ,मूत्र में में धातु का आना ,पेट संबंधी रोग ,आवाज की खराबी , आंतों की खराबी बार बार दस्त लगना ,मल मूत्र का रुक जाना, विषम ज्वर ,उल्टी ,हिचकी ,खुजली ,हृदय रोग कैंसर रोग ,पेट दर्द , पेट का ट्यूमर ,लिवर पथरी, तिल्ली के रोग ,मूत्राघात यह सब रोग दूर होते हैं
दंत मंजन के लिए इसके बारीक पाउडर का उपयोग करें मुंह के घाव में , बवासीर में इसका लेप भी लाभप्रद है
यह शोधित हरड़ जो भी दोष दूर करती है वह अपने प्रभाव से ही करती है
जो लोग इससे शारीरिक ताकत प्राप्त करना चाहते हैं वह वर्षा ऋतु में सेंधा नमक के साथ शरद ऋतु तक शक्कर के साथ और हेमंत ऋतु में सोंठ के साथ शिशिर ऋतु में पीपल के साथ वसंत ऋतु में शहद के साथ और ग्रीष्म ऋतु में गुड़ के साथ सेवन करें शरीर में अत्यधिक ताकत की प्राप्ति होगी
इस शोधित हरित को यदि चबाकर खाया जाए तो अमाशय की जठराग्नि को वृद्धि करती है पत्थर पर पीस कर खाया जाए तो मल को साफ करती है उबालकर खाया जाए तो मल को रोकती है भूनकर खाया जाए तो त्रिदोष दूर करती है भोजन के साथ सेवन करें तो बुद्धि बल और इंद्रियों को विकसित करती है पित और वायु को नष्ट करती है भोजन के साथ मूत्र विष्ठा और मल पदार्थों को बाहर निकालती है और जब भोजन करने के बाद इसे ऊपर से खाया जाए तो अन और पान संबंधी दोष वात-पित्त-कफ से उत्पन्न होने वाले विकारों को शीघ्र हरने वाली होती है
सेंधा नमक के खाने के साथ कफ शक्कर के साथ खाने से पित और घी के साथ खाने से वात संबंधी रोग और गुड़ के साथ खाने से सारी बीमारियां दूर करती हैं
यह हल्के रूप से शरीर से मल को बाहर निकालता है वात पित्त कफ के दोषों को और बलगम को पखाने के द्वारा बाहर निकालता है यह न केवल दस्त द्वारा आंतों में जमा हुआ दूषित मल को बाहर निकालता है बल्कि रोग से मुकाबला करने की शक्ति भी बढ़ाता है जहां एक तरफ शरीर में दूषित पदार्थ को आतो में से खींचकर मल के द्वारा बाहर फेंकता है वही शरीर के विभिन्न मार्गो में दोषी दोष धातु और मल से जो मार्ग रुक जाता है जिसके कारण विभिन्न प्रकार के रोग होने की संभावना होती है यह शोधित हरड़ सभी मार्ग को उनके अवरोध को दूर कर के शरीर को शुद्ध करती है यह प्रत्येक अंग ,हरदिया, मस्तिष्क पेट, खून आदि को प्राकृतिक दशा में नियमित करती है इसी कारण इस शोधित हरड़ का सेवन करने वाला बीमारियों से बचा रहता है
यह शरीर को भरपूर ताकत देने का भी गुण रखता है शरीर की सातों धातुओं को शुद्ध और पुष्ट करता है और शरीर में शक्ति स्फूर्ति और ताजगी प्रदान करता है शरीर की समस्त क्रियाओं को सुधारता और स्वभाविक बनाता है शरीर के जो छोटे-छोटे सूक्ष्म कोष होते हैं उनको स्वस्थ दशा में बनाए रखता है और समय से पहले आने वाले वृद्धावस्था को दूर करता है
रोजाना रात को सेवन करने से फुंसियां दाने और मुंहासे आदि नहीं निकलते फुंसियों पर इस शोधित हरड़ को पीसकर लेप करने से वह ठीक हो जाती हैं
1-बल बुद्धि बढ़ाने के अथवा मल-मूत्र साफ लाने के लिए इसे भोजन के साथ खाएंगे
2- भोजन पचाने के लिए जुखाम या खांसी या फ्लू या नसों में दर्द के लिए भोजन के बाद खाएं
3- इस शोधित हरड़ को चबाकर खाने से भूख बढ़ती है पीसकर चूर्ण खाने से पेट साफ होता है भारत में उबालकर खाने से दस्त बंद हो जाते हैं और मल बंध जाता है
4- भूनकर खाने से वात पित्त और कफ तीनों दोषो को समाप्त करती है
यदि आप इस शोधित हरड़ से अपने शरीर का कायाकल्प करना चाहते हैं तो उसकी भी विधि कहता हूं
वर्षा ऋतु में सेंधा नमक के साथ शरद ऋतु में शर्करा के साथ हेमंत में सूट के साथ और शिशिर में पीपली के साथ वसंत में मधु के साथ और गर्मियों में गुड़ के साथ शोधित हरड़ का चूर्ण खाइए पुरे शरीर का कायाकल्प हो जाएगा बुढ़ापा चला जाएगा जवानी आ जाएगी
5- बवासीर ,पेट की अपच,पेट की गांठ रक्तपित्त जीवन में मुनक्का के साथ दाद खाज पीलिया रोग में गोमूत्र के साथ हर्निया हो जाने पर अरंडी के तेल के साथ लेना चाहिए
रास्ता चलकर थके हुए , दुबले -पतले व्रत रखने वाले अधिक गर्म प्रकृति वाले गर्भवती स्त्री को वैद्य जानकारी में उपयोग करना चाहिए
उपयोग- रात को सोते समय एक छोटी चम्मच मात्रा 1 से 3 ग्राम की फंकी गुनगुने पानी के साथ सोते समय ले सप्ताह में एक दिन छुट्टी भी रख ले
मैंने इस शोधित और संस्कारित हरड़ का सौ ग्राम का पैकेट बनाया है जिसकी कीमत है 500 R's जिसमें कुरियर खर्च भी शामिल है इच्छुक व्यक्ति मेरे WhatsApp 90129 50604 पर बता सकते हैं
राजेश तालान
ब्रह्मचारी गुरु शिष्य परंपरा से बना प्राणाचार्य

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